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संजर से अजमेर का सफ़र – पार्ट -7

एक बार जमाले यार का जलवा देख लेने के बाद हुज़ूर ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ रदिअल्लाहू तआला अन्हु के दिल में इल्म हासिल करने का जज़्बा किसी तेज़ समुन्दर की लहरों की मानिंद अंगड़ाईयाँ ले रहा था, और इश्क की ये मौजे  तेज़ी से साहिल (किनारा) यानि मंज़िल की जानिब बढ़ने को मुन्तज़िर थी । राहे हक़ का...
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संजर से अजमेर का सफ़र – पार्ट -6 

    हुज़ूर ख्वाजा ग़रोब नवाज़ रदिअल्लाहू तआला अन्हु एक रोज अपने बाग में पौधों को पानी दे रहे थे कि आपको एक अजीब सी खुश्बू महसूस हुई, लगा जैसे कोई उन्हें पुकार रहा हो, आप बेचैन हो उठे, यहाँ तक की आप बाग़ से बाहर आ गए और बाहर आपने एक बुजुर्ग मज्जूब कलंदर को अपने बाग़ के बाहर  बै...
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