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आखिर कौन से जवाब पर चहक हुई इतनी खुश

 

चहक को पढ़ने की ईच्छा थी और साथ ही कंप्यूटर सीखने की भी ललक थी, मैंनेे चहक से कहा- आस-पास कंप्यूटर इंस्टीट्यूट में जा कर बात कर लेना… लेकिन चहक के साथ ये परेशानी थी कि, जहाँ भी क्लास पता करने के लिये जाती तो सब उसे भेदभाव की दृष्टि से देखते और मना कर देते कि हम आपको यहाँ नहीं पढ़ा सकते। ये शब्द सुनकर चहक की आँख नम हो जाती थी।

 

जब से मेरी मुलाकात चहक से हुई थी तब से मेरी बात लगातार होती है और चहक को मैं जहाँ बोलती वहाँ चहक जाती थी…. फिर चहक बोली दीदी मुझे सब मना कर देते हैं…मै बोली चहक सब ऐसे नहीं होते अब ये मेरी जिम्मेदारी है की तुमको अपने साथ लेकर जाऊँगी और ज़रूर तुम्हारा एडमिशन होगा।

 

कुछ दिन पहले में अपनी ड्यूटी से 2 बजे फ्री होकर चहक से मिली और फिर चहक को अपने राम प्यारी एक्टिवा गाड़ी मे बिठाकर ले गयी। और हम जहाँ गये उसके कंप्यूटर क्लास की बात करने के लिये वहाँ जो मैडम थी उन्होंने बहुत ही नम्रता पूर्वक बात की और मुझसे कहने लगी कि आप दोनों क्लास आएँगे मैं बोली नहीं…ये छोटी बहन बस क्लास आएगी और आप अच्छे से उसका ध्यान दीजियेगा मैडम….

मैडम ने प्यार से मुस्कुराते हुये हाँ जरूर आप निश्चित रहिये हम रहेंगे यहाँ कोई कुछ नहीं बोलेगा….ये जवाब सुनते ही मैं और चहक खुश हो गये फिर मैंने मैडम से कहा कि कल से क्लास शुरू कर देते है…मैडम ने हाँ कहा।

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फिर भी चहक के मन में थोड़ा डर था, दीदी कोई कुछ बोलेगा तो नहीं फिर में उसको अपने घर ले आयी और सब बातो को समझाने लगी की चहक आपकी जिंदगी की एक अच्छी शुरुआत हो गयी है, अब हिम्मत नहीं हारना है और न ही डरना है चहक खुश हो गई। हाँ…दीदी ज़रूर फिर साथ खाना खाये और फिर शाम की चाय पीकर वापस चहक को उसके घर छोड़ आयी।

 

आज चहक का पहला दिन था, इसलिये मैं भी उसके साथ गई थी…. क्योंकि सबको हिचकिचाहट होती है पहले दिन स्कूल जाने में हो या फिर ऑफीस जाने में क्योंकि किसी से जान-पहचान नहीं होती है, और चहक की अलग ही बात है वो एक ट्रांसजेंडर है फिर क्लास के सभी बच्चों से चहक को सामना करना था। चहक को वहाँ किसी ने कुछ नहीं कहाँ सब अपने पढ़ाई में व्यस्त थे। फिर थोड़ी देर बाद चहक को अच्छा लगने लगा।

 

ये सब बताने का मेरा एक ही कारण है कि हम सबको सभी की परेशानी समझना चाहिये। क्योंकि चहक जहाँ भी कंप्यूटर सीखने की बात कही वहाँ उसको इसलिये नाकार दिये की तुम एक ट्रांसजेंडर हो हम नही पढ़ा सकते। आप ये बताइये की जिस इंस्टीट्यूट मे ऐसे सोच वाले सर मैडम कैसी शिक्षा देंगे ?

अगर किसी भी इंस्टीट्यूट के सर-मैडम सही रहेंगे और उनकी सोच अच्छी रहेगी तो फिर हर कोई पढ़ सकता है। क्योंकि एक अच्छा गुरु ही अपने शिष्य को एक अच्छी शिक्षा प्रदान कर सकते है।

अगर किसी व्यक्ति का दिल साफ न हो तो वो चाहे कितना भी खूबसूरत हो उसका कोई महत्व नही होता।
– स्मिता तांडी (कॉन्स्टेबल, दुर्ग पुलिस) #Jivandeep 05/07/2018

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