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माँ कहती है भीख मांगकर करा दूंगी आपरेशन

  ❤❤ रायपुर, स्मार्ट सिटी। करोड़ों दान करने से कही बेहतर है अपना कुछ पल जरूरतमंदों के साथ बिताया जाए और उनकी तकलीफों को करीब से समझकर उन्हें दूर करने का प्रयास ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। दरअसल आज हम आपको एक ऐसे हकीकत से रूबरू कराने जा रहे हैं जो आपको जानना जरूरी है। मित्र रविन्द्र क्षत्री की जुबानी… आज दोपहर रायपुर के गढ़कलेवा (देसी व्यंजनों के लिए उत्तम जगह)  में खाना खाने बैठा था मैं तभी एक बच्चे ने करीब आ कर भीख मांगी, कुछ दे दो पैसा .. मैंने पूछा क्यों पैसे का क्या करोगे? जवाब मिला- खाना खाऊंगा, भूख लगी है। उसका जवाब मिलते ही लगा कि एक कहानी फिर मुझे दस्तक दे रही है। उसे प्यार से करीब बुलाकर उसके भीतर झाँकने की कोशिश की मैंने।   बार बार पूछने पर बताया कि वह स्कूल नहीं जाता है। माँ भीख मांगने निकल जाती है। शाम को घर वापस आती है। पूछने पर बेटा तुम क्यों स्कूल नहीं...
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एक और जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी

❤❤ दोस्तों एक और जिंदगी को बचाने की जिम्मेदारी ली है हमने, दी हुई न्यूज़ कटिंग को पढ़कर प्लीज यथासंभव मदद करने का कस्ट करें। अपनी सहयोग राशि यहाँ जमा कर सकते हैं आप… Sumit Foundation (सुमित फाउंडेशन) Federal Bank a/c no. 16660100056756 (फेडरल बैंक) IFSC कोड- FDRL0001666 व्यापार विहार ब्रांच, बिलासपुर, छत्तीसगढ़, रविन्द्र सिंह क्षत्री, 7415191234 सुमित फाउंडेशन, “जीवनदीप”   (दैनिक भास्कर, बिलासपुर संस्करण...
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एक बार फिर किसी की खुशहाल ज़िंदगी बसाने का मौका

  रायपुर ( स्मार्ट सिटी ) . तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी … अंधेरों से मिल रही रोशनी… वैसे ये गीत दो दिलों के अपनेपन का अहसास दिलाता तो जरूर है। लेकिन आज बदलते दौर में ये अपनापन कम होता नजर आ रहा है। अधिकत्तर इक-दूजे का साथ निभाने के लिए बंधे पवित्र बंधन में सभी शादीशुदा जोड़े हमेशा हंसते, मुस्कुराते, लड़ते-झगड़ते, रूठते-मनाते ज़िन्दगी के सफ़र को तय करते हुए अपनी मंज़िल पा ही लेते हैं।   कुछ ऐसे भी हैं, जो आज समाज में अकेले ज़िन्दगी का संघर्ष करते दिख जाएँगे, लेकिन आप उन्हें पहचान नहीं पाएंगे।   ये ऐसे लोग हैं, जो तक़दीर के लिखे फैसलों के शिकार हैं। इनमें देश की रक्षा करने वाले शहीद की पत्नी भी हो सकती है या किसी शराबी, अत्याचारी आदि की प्रताड़ना की शिकार हुई महिला, जिसे समाज आज उपेक्षा भरी निगाहों से भी नहीं देखती। खैर… मुद्दे की बात ये है कि, पिछले पांच वर्षों...
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आखिर कौन से जवाब पर चहक हुई इतनी खुश

  चहक को पढ़ने की ईच्छा थी और साथ ही कंप्यूटर सीखने की भी ललक थी, मैंनेे चहक से कहा- आस-पास कंप्यूटर इंस्टीट्यूट में जा कर बात कर लेना… लेकिन चहक के साथ ये परेशानी थी कि, जहाँ भी क्लास पता करने के लिये जाती तो सब उसे भेदभाव की दृष्टि से देखते और मना कर देते कि हम आपको यहाँ नहीं पढ़ा सकते। ये शब्द सुनकर चहक की आँख नम हो जाती थी।   जब से मेरी मुलाकात चहक से हुई थी तब से मेरी बात लगातार होती है और चहक को मैं जहाँ बोलती वहाँ चहक जाती थी…. फिर चहक बोली दीदी मुझे सब मना कर देते हैं…मै बोली चहक सब ऐसे नहीं होते अब ये मेरी जिम्मेदारी है की तुमको अपने साथ लेकर जाऊँगी और ज़रूर तुम्हारा एडमिशन होगा।   कुछ दिन पहले में अपनी ड्यूटी से 2 बजे फ्री होकर चहक से मिली और फिर चहक को अपने राम प्यारी एक्टिवा गाड़ी मे बिठाकर ले गयी। और हम जहाँ गये उसके कंप्यूटर क्लास ...
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