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घर बैठे फैशनेबल खरीदारी का मौका

  रायपुर स्मार्ट सिटी। लिली चौक पुरानी बस्ती रायपुर निवासी एक दंपती ने महिलाओं के लिए आकर्षक और उनकी बजट में बेहतर डिज़ाइन के इमीटेशन ज्वेलरी की श्रृंखला जारी की है। खास बात यह है कि श्रीमती संगीता गुप्ता घर पर खाली समय में सोशल मीडिया के जरिये पूरे देश में महिलाओं को घर बैठे मनपसंद नेकलेस, टॉप्स, इयरिंग, आदि की तस्वीरों को साझा करतीं हैं, जिन्हें जो पसंद हो, उसे उनके दिए पते पर डिलीवर कर देतीं हैं।   उन्होंने बताया कि शुरुआत में ही बेहतर रेस्पांस मिला और आईडिया ने काम करना शुरू का दिया। आलम ये है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के साथ देशभर से बुकिंग और आर्डर मिल रहे हैं। हमने प्रॉफिट मार्जिन कम रखा है। इसलिए इनके प्राइस किफायती हैं, जो सभी को भा रहे हैं।     सिम्पली लाइफ परिवार की ओर से शुभकामनाएं। नोट: आप भी हमसे जुड़कर डिजिटल स्टोर, होम डिलीवरी सुविधा के साथ ...
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प्रेस क्लब के सम्मान से टिमटिमाते दीये की बढ़ी लौ

इस जहां में दीये की तरह टिमटिमा रहे है, आपके सम्मान ने इसकी लौ को बढ़ा दिया। (इस सम्मान को लेकर यह पंक्ति बनी है)   30 नवंबर को रायपुर प्रेस क्लब ने पत्रकारिता में उल्लेखनीय काम करने के लिए सम्मानित किया। सबसे ज्यादा खुशी यह थी कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ पत्रकारिता की पहचान श्री रमेश नैयर जी के हाथों मिला और हमारी बिरादरी ने दिया। मेरे साथ मेरे गाँव जनकपुर के छोटे भाई ज्ञानेंद्र तिवारी और भास्कर के साथी भाई प्रवीण देवांगन समेत 12 लोगों को यहाँ सम्मानित किया गया। अच्छा है, इस भरोसे से खुद के अंदर एक जोश के साथ बेहतर करने की इच्छा और बढ़ जाती है। सभी को हार्दिक शुभकामनाएं और शुक...
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दुनिया और पत्नी के ताने में फर्क होता है…

हरिराम आज सुबह-सुबह जल्दी उठ गया था…पत्नी चिंताबाई ने कहा था पीटीएम के लिए जाना है…हरिराम अपने स्कूल के वक्त को याद करता हुआ पत्नी से कह रहा था ये सब चोचले हमारे समय में तो नहीं होते थे…चिंता बाई ने घूरते हुए देखा और कहा- इसीलिए तो पत्रकार हो, नहीं तो डॉक्टर-इंजीनियर नहीं होते… दुनिया के ताने और पत्नी के ताने में फर्क होता है…कंघी करते-करते तीरछी नज़रों से चिंताबाई को देखा। चिंताबाई अपने काम में ही लगी रही…जैसे सहज भाव से कोई बात कह दी हो…   अचानक हरिराम ने चिंताबाई पर पलटवार किया… “पत्रकार था तो मुझसे शादी क्यों की…पिताजी के यहां कुआं नहीं था क्या…कूद जाती उसमें!” चिंता बाई ने अपनी तरफ आते हुए इस तीर के पहले ही अपने धनुष पर मंत्र पढ़कर इसका काट चढ़ा लिया था और अपने तरफ आते तीक्ष्ण बाण को काटने अपना तीर छोड़ दिया-“सुन...
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जेब में पारले-जी बिस्कुट लेकर दफ्तर जाना

रिपोर्टर हरिराम ऑफिस से निकला। बेसमेंट में संपादक की कार के पास खड़ा हो गया। इधर-उधर सीसीटीवी कैमरे की नज़र से बचकर यहां तक आया। जेब से कील निकाली और संपादक तोपचंद की कार में खरौंचे मारने लगा। अब आप अंदाजा लगाइए कि कितना ज्यादा भरा पड़ा बैठा था हरिराम।     दिल फट गया था। अंदर ही अंदर घुटता, गालियां देता, लेकिन उखाड़ कुछ पाता नहीं था।   तोपचंद ने हरिराम की हालत यह कर दी थी कि जेब में पारले-जी बिस्कुट लेकर दफ़्तर जाना पड़ रहा था। खाने की छुट्टी देने को भी तैयार नहीं।     दरअसल चम्मचलाल ने तोपचंद के कान पर जबरदस्त कब्जा जमाया था। उसने ये बता दिया था कि ये लोग खाने के नाम पर एक-एक घंटे गायब रहते हैं। बस, टिफिन टाइम बंद। कहते हैं न… जाकै पैर न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई..। हरिराम के दर्द को हरिराम के अलावा कौन समझ सकता था। वो बेचारा पेट में ...
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