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एक बार फिर किसी की खुशहाल ज़िंदगी बसाने का मौका

  रायपुर ( स्मार्ट सिटी ) . तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी … अंधेरों से मिल रही रोशनी… वैसे ये गीत दो दिलों के अपनेपन का अहसास दिलाता तो जरूर है। लेकिन आज बदलते दौर में ये अपनापन कम होता नजर आ रहा है। अधिकत्तर इक-दूजे का साथ निभाने के लिए बंधे पवित्र बंधन में सभी शादीशुदा जोड़े हमेशा हंसते, मुस्कुराते, लड़ते-झगड़ते, रूठते-मनाते ज़िन्दगी के सफ़र को तय करते हुए अपनी मंज़िल पा ही लेते हैं।   कुछ ऐसे भी हैं, जो आज समाज में अकेले ज़िन्दगी का संघर्ष करते दिख जाएँगे, लेकिन आप उन्हें पहचान नहीं पाएंगे।   ये ऐसे लोग हैं, जो तक़दीर के लिखे फैसलों के शिकार हैं। इनमें देश की रक्षा करने वाले शहीद की पत्नी भी हो सकती है या किसी शराबी, अत्याचारी आदि की प्रताड़ना की शिकार हुई महिला, जिसे समाज आज उपेक्षा भरी निगाहों से भी नहीं देखती। खैर… मुद्दे की बात ये है कि, पिछले पांच वर्षों...
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आखिर कौन से जवाब पर चहक हुई इतनी खुश

  चहक को पढ़ने की ईच्छा थी और साथ ही कंप्यूटर सीखने की भी ललक थी, मैंनेे चहक से कहा- आस-पास कंप्यूटर इंस्टीट्यूट में जा कर बात कर लेना… लेकिन चहक के साथ ये परेशानी थी कि, जहाँ भी क्लास पता करने के लिये जाती तो सब उसे भेदभाव की दृष्टि से देखते और मना कर देते कि हम आपको यहाँ नहीं पढ़ा सकते। ये शब्द सुनकर चहक की आँख नम हो जाती थी।   जब से मेरी मुलाकात चहक से हुई थी तब से मेरी बात लगातार होती है और चहक को मैं जहाँ बोलती वहाँ चहक जाती थी…. फिर चहक बोली दीदी मुझे सब मना कर देते हैं…मै बोली चहक सब ऐसे नहीं होते अब ये मेरी जिम्मेदारी है की तुमको अपने साथ लेकर जाऊँगी और ज़रूर तुम्हारा एडमिशन होगा।   कुछ दिन पहले में अपनी ड्यूटी से 2 बजे फ्री होकर चहक से मिली और फिर चहक को अपने राम प्यारी एक्टिवा गाड़ी मे बिठाकर ले गयी। और हम जहाँ गये उसके कंप्यूटर क्लास ...
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‘ अंकल आंटी अब हमारे ही परिवार का हिस्सा हैं…’

  रायपुर (स्मार्ट सिटी)। अजमत अंकल (73 वर्ष ) रतनपुर के एक फार्महाउस में बने छोटे से घर में रहते हैं। यह फार्महाउस एक भाईजान का है जहाँ इन्होंने अंकल आंटी जी के तंग हालत को देखते हुए इन्हें रहने की परमिशन दी है। इस परिवार की जानकारी मुझे मेरे दोस्त फिरोज भाई के द्वारा पता चली। आंटी को हार्ट में कोई गंभीर समस्या थी और कमर के पास की टूटी हुई हड्डी की परेशानी थी वो अलग। ऐसा ही कुछ अंकल जी के साथ था, उन्हें यूरिन वाली नाली के पास समस्या थी। इन सबसे बड़ी समस्या थी की इन दोनों की कोई संतान नहीं है। अकेले किसी तरह अपना गुजर बसर कर लेते हैं दोनों बीमारी दोनों की इतनी गंभीर, फिर इन्हें साथ ले जा कर जिम्मेदारी पूर्वक इलाज करवाए कौन???     सबसे पहले हमारे जीवनदीप से वैभव पाण्डेय भैया इनके घर गए, सारी वस्तुस्थिति की जानकारी ली , मेडिकल रिपोर्ट्स देखी। पता चला हालत ठीक नहीं है..आं...
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नाइजीरिया में भारतीय फिल्म ‘फेरस’ को मिला अवार्ड

24  जून से 1  जुलाई तक, नाइजीरिया के लागोस शहर में  चले “रियल टाइम अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल 2018 ” में भारतीय फिल्म ‘फेरस’ को सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म के सम्मान से नवाज़ा गया।   “फेरस”, सहरसा के रहने वाले अमृत सिन्हा द्वारा निर्मित है और उसके निर्देशक हैं मुंबई के शौर्य सिंह।   शौर्य सिंह के शब्दों में “यह एक विषम पटकथा वाली फिल्म है। फेरस फिल्म की कहानी एक अलग ढंग से सुनाई गयी है जिसमे दर्शको को एक पहेली सुलझाने की तरह थोड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। नाइजीरिया में भारतीय सिनेमा को काफी सराहा जाता है। फेस्टिवल डायरेक्टर की बात माने तो फेरस को पॉपुलर डिमांड पर 2 बार चलाया गया। ‘फेरस’ को सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म व सर्वश्रेष्ठ पटकथा,  2 श्रेणियों में नामित किया गया था।   शौर्य सिंह द्वारा लिखित एवं न...
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