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जीवन : पृथ्वी पर और अंतरिक्ष में

फ्रांसीसी लेखक जूल्स वर्न का 1873 का उपन्यास `अस्सी दिनों में पूरे विश्व का चक्कर` काफी प्रसिद्ध हुआ था। लेकिन तब यह एक चुनौती थी। आज लगभग डेढ़ सदी बाद कोई भी हवाई जहाज़ पर सवार होकर पूरे विश्व का चक्कर अस्सी घंटों में लगा सकता है। और आज हम आधी दुनिया यानी भारत से कैलिफोर्निया का सफर मात्र 20 घंटों में पूरा कर सकते हैं। बेशक यह हमारी शरीर घड़ी को गड़बड़ा देता है। यहां जब दिन होता है उस समय वहां रात होती है। इसलिए हमारी दैनिक लय के समायोजन में एक-दो दिन लग जाते हैं। इस तरह की दैनिक लय की जैविक क्रियाविधि (न केवल लोगों में बल्कि पौधों में भी) को पहचाना गया है और इस साल का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को इसी जैविक घड़ी के खुलासे के लिए दिया गया है। अंतरिक्ष यात्रियों के जैव रसायन, कोशिकीय जीवविज्ञान और जीनोम जीवविज्ञान का क्या होता है? क्या वे अपने पृथ्वी पर रहने वाले साथियों ...
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एक ही फंडा था- बने रहो पगला, काम करेगा अगला…।

सुबह के साढ़े दस बज चुके थे। पत्रकार हरिराम अपनी उस रजाई के अंदर ठंड से नूराकुश्ती कर रहा था, जिसमें या तो सिर आ सकता था या फिर पैर। पत्नी चिंताबाई कबसे उससे कह रही थी, कि नई रजाई ले लीजिए। हरिराम ने वादा किया था इंक्रीमेंट के बाद ले लेंगे। लेकिन जब इंक्रीमेंट हुआ, तो होश फ़ाख्ता हो गए। संपादक तोपचंद ने बड़े-बड़े सपने दिखाए थे। मन लगाकर काम करो…मुझे हफ्ते में एक बाईलाइन तो चाहिए ही…इस अफसर के खिलाफ खबर लाओ…उस अफसर को निपटाओ…यहां जाओ..वहां जाओ…सब किया, लेकिन सैलरी बढ़ी चार परसेंट। थाली में आखिरी निवाले के बाद जितने दाने बचे थे, उन्हीं दानों को मिलाकर यह चार परसेंट बना था, जबकि चम्मचलाल ने 17 परसेंट हासिल किए थे। तो इस साल चटनी से भी कम बढ़ी हुई सैलरी ने पूरा साल खट्टा कर दिया था और हरिराम को इतना गरम कि उसे यकीन था कि गुस्से की आग में ये ठंड तो यूं ही निकल...
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व्यंग्य : चोखेलाल भी गरीब था, पर चोखा था

दफ़्तर में की-बोर्ड और दिमाग की दही करने के बाद जब हरिराम की खबर का संपादक ने रायता फैला दिया, तो हरिराम अपने मन ही मन उनकी माता-बहनों को याद करता हुआ दफ़्तर से झल्लाता हुआ निकला। दरअसल, दिनभर यहां-वहां, इस दफ़्तर, उस दफ़्तर भटकने के बाद कलेक्टर मांगेलाल के चपरासी चोखेलाल ने दो कागज़ लाकर दिए थे, जिसमें लोकतंत्र की मां एक ग़रीब औरत ‘जनता’ के पैसे की लूट का सबूत था। चोखेलाल भी गरीब था, पर चोखा था। हरिराम से कहा कि भैया, जनता की बात सबको पता चलनी ही चाहिए। हरिराम ने वादा किया, चिंता मत करो…जनता की बात जरूर आएगी। अपने दिल, दिमाग में कलेक्टर मांगेलाल को ठीक करने का जज्बा लिए हरिराम दफ़्तर पहुंचा। डोकलाम विवाद के दौरान जिस तेजी से तोपों को बार्डर पर तैनात किया गया, कुछ उतनी ही तेजी से की-बोर्ड पर उंगलियां चलीं। खबरों का गोला तैयार हो गया संपादक तोपचंद के मुंह में जाने के लिए, मगर ...
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आवेदकों की मांग पर बढ़ी तारीख…

रायपुर स्मार्ट सिटी (वीएनएस)। रायपुर विकास प्राधिकरण की ओर से कमल विहार में 3 बीएचके फ्लैट्स एलआईजी 2 के आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ा कर 15 नवंबर 2017 कर दी गई है। यह फैसला कमल विहार को लेकर लोगों के बढ़ते रुझान और मांग पर लिया गया है। प्रतीकात्मक चित्र   इसी प्रकार ईडब्लूएस और एलआईजी – 1 के आवेदन 30 नवंबर तक लिए जाएंगे।   प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एमडी कावरे ने कहा कि, कमल विहार में एलआईजी 2 का कारपेट एरिया 645 वर्गफुट है और कीमत लगभग साढ़े 10 लाख रुपए है।   जबकि दो बीएचके के ईडब्लूएस का कारपेट एरिया 322 वर्गफुट और कीमत 5 लाख है वहीं दो बीएचके के एलआईजी 1 फ्लैट्स का कारपेट एरिया 586 वर्गफुट और कीमत लगभग 8 लाख रुपए है। उन्होंने कहा कि आवेदकों की लगातार मांग पर प्राधिकरण ने आवेदन पत्र जमा करने की तिथि आगे बढ़ाई गई है।...
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