El Niño is taking an increasingly dangerous turn; Earth’s climate map is colored red.
El Nino Update 2026: दुनिया भर के मौसम विज्ञानियों ने तेजी से शक्तिशाली हो रहे अल नीनो (El Nino) को लेकर एक बार फिर गहरी चिंता व्यक्त की है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में यह मौसमी घटना दिसंबर के आसपास अपने चरम पर पहुंच सकती है। वर्ष 1950 के बाद से दर्ज की गई सबसे मजबूत अल नीनो घटनाओं में इसकी गिनती होने की संभावना जताई जा रही है। वैज्ञानिकों द्वारा साझा किए गए हालिया जलवायु नक्शों में दुनिया के एक बहुत बड़े हिस्से को गहरे लाल रंग में दिखाया गया है, जो बढ़ते तापमान का स्पष्ट संकेत है।
प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री ऊपर: दिसंबर में अपने चरम पर पहुंचेगी यह मौसमी घटना
WMO के पूर्वानुमान के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर के दौरान मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान (SST) सामान्य से औसतन 3.7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान है। मौसम विज्ञानी रयान माउवे ने सोशल मीडिया पर जलवायु नक्शा साझा करते हुए चेताया है कि सर्दियों के मौसम में भी अल नीनो पूरी ताकत के साथ सक्रिय बना हुआ है। जलवायु विज्ञानी जेके हाउसफादर के अनुसार, इस वर्ष अल नीनो लगातार मजबूती पकड़ रहा है और नीनो 3.4 क्षेत्र में तापमान सामान्य से 3.4 डिग्री सेल्सियस ऊपर तक पहुंच चुका है।
प्रमुख मौसम विशेषज्ञों ने इस असाधारण स्थिति को ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ की संज्ञा दी है।
दुनिया भर के मौसम और वर्षा के पैटर्न पर असर: सूखे से लेकर बाढ़ तक के बढ़ रहे खतरे
अल नीनो के अत्यधिक मजबूत होने से वैश्विक स्तर पर मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है:
- वर्षा और सूखे का असंतुलन:
- दुनिया के कई हिस्सों में इसकी वजह से गंभीर सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है, तो वहीं कुछ अन्य क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश और भयंकर बाढ़ का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।
- मानव-जनित जलवायु परिवर्तन:
- WMO का यह भी कहना है कि मानव गतिविधियों के कारण पहले से ही गर्म हो चुके महासागरों के बीच इस अल नीनो का प्रभाव और अधिक व्यापक व विनाशकारी हो सकता है।
- स्थानीय पूर्वानुमान नहीं:
- संगठन ने स्पष्ट किया है कि यह एक व्यापक मौसमी संकेत (Broad-scale Climate Signal) है और इसे किसी विशिष्ट देश या क्षेत्र के स्थानीय मौसम के सटीक पूर्वानुमान का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
क्या है अल नीनो और ईएनएसओ चक्र? जानिए क्यों बदल रहा है महासागरों का मिजाज
अल नीनो की पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए इसके वैज्ञानिक आधार को जानना आवश्यक है:
- ईएनएसओ (ENSO) चक्र:
- अल नीनो-दक्षिणी दोलन (El Nino-Southern Oscillation) चक्र का ही गर्म चरण अल नीनो कहलाता है।
- समुद्र का गर्म होना:
- इस प्राकृतिक घटना के दौरान मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से काफी अधिक गर्म हो जाता है।
- वैश्विक प्रभाव:
- महासागरों के गर्म होने से वायुमंडलीय दबाव और हवाओं का रुख बदलता है, जिसका सीधा असर दुनिया भर के तापमान, बारिश और मौसमी चक्रों पर पड़ता है।
- अवधि:
- यह चक्र सामान्य तौर पर कुछ वर्षों के अंतराल पर प्रकट होता है और एक बार सक्रिय होने के बाद कई महीनों तक प्रभावी रह सकता है, जिसके प्रभाव फरवरी 2027 तक बने रहने की आशंका है।
El Nino Update 2026
फरवरी 2027 तक प्रभावी रहने वाले इस तीव्र अल नीनो ने वैश्विक वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। बढ़ते समुद्री तापमान और बदलते मौसमी पैटर्न से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
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