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Train Comforter Facility: ट्रेन के गंदे और दुर्गंधयुक्त कंबलों से मिलेगी मुक्ति, रेलवे ने शुरू की आधुनिक कंफर्टर की सौगात

Indian Railways New Comfort Policy 2026: ट्रेन के गंदे कंबलों से मिलेगी मुक्ति, राजधानी एक्सप्रेस में शुरू हुआ कंफर्टर देने का पायलट प्रोजेक्ट

Cleaning and sanitization to be carried out after every round trip: Railways’ strict new measure regarding hygiene

Train Comforter Facility: भारतीय ट्रेनों के वातानुकूलित (AC) कोचों में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से खराब गुणवत्ता, साफ-सफाई के अभाव और दुर्गंधयुक्त कंबलों को लेकर मिलने वाली शिकायतों पर अब भारतीय रेलवे ने ठोस कदम उठाना शुरू कर दिया है।




यात्रियों के सफर को और अधिक आरामदायक, स्वच्छ और सुविधाजनक बनाने के लिए रेलवे ने एक नया पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। इसके तहत अब कंबलों के विकल्प के रूप में हल्के और प्रिंटेड कंफर्टर (Comforters) उपलब्ध कराने की शुरुआत कर दी गई है, जो यात्रियों के अनुभव को पूरी तरह बदलने का दम रखते हैं।

नई दिल्ली-हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस से पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत: फर्स्ट एसी के यात्रियों को मिल रहा है नया अनुभव

यात्रियों की मांग और संसद तक उठे मामलों के बाद रेलवे ने इसकी शुरुआत बेहद प्रीमियम रूट से की है:

  • राजधानी एक्सप्रेस में शुरुआत:
  • भारतीय रेलवे ने 11 अक्टूबर से नई दिल्ली-हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस (New Delhi-Howrah Rajdhani Express) के फर्स्ट एसी (First AC) कोचों में कंबलों की जगह आधुनिक कंफर्टर उपलब्ध कराने की पायलट परियोजना शुरू की है।
  • दिखने में आकर्षक और हल्के:
  • ये कंफर्टर देखने और इस्तेमाल करने में एक हल्की रजाई की तरह होते हैं, जो वजन में बेहद हल्के और शरीर को तुरंत गर्माहट व आराम देने वाले होते हैं।
  • स्वच्छता और आराम का मेल:
  • रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यात्रियों के प्रीमियम सफर को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से डिजाइन किए गए प्रिंटेड कंफर्टर बांटे जा रहे हैं, ताकि यात्रियों को घर जैसा आराम मिल सके।

हर राउंड ट्रिप के बाद होगी धुलाई और सैनिटाइजेशन: साफ-सफाई को लेकर रेलवे का सख्त और नया कदम

ट्रेनों में मिलने वाले कंबलों की धुलाई और साफ-सफाई हमेशा से एक बड़ा विवादास्पद मुद्दा रहा है। यात्रियों की यह आम शिकायत रही है कि ट्रेनों में मिलने वाले कंबल ठीक से साफ नहीं होते:

  • पुरानी व्यवस्था और शिकायतें:
  • नवंबर 2024 में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में जानकारी दी थी कि नियमों के तहत कंबलों को महीने में कम से कम एक बार धोया जाता है, लेकिन भारी मांग के कारण यह नाकाफी साबित हो रहा था।
  • राउंड ट्रिप सैनिटाइजेशन:
  • अब नई पायलट योजना के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि प्रत्येक राउंड ट्रिप (Round Trip) के तुरंत बाद इन कंफर्टर्स की उच्च स्तरीय धुलाई और सैनिटाइजेशन किया जाएगा, ताकि अगली यात्रा पर जाने वाले यात्री को पूरी तरह स्वच्छ सामग्री मिले।

कंबल पर कवर लगाने का प्रयोग भी जारी: यात्रियों के फीडबैक के आधार पर तय होगा आगे का विस्तार

कंफर्टर के अलावा रेलवे स्वच्छता के मोर्चे पर एक अन्य विकल्प पर भी काम कर रहा है:

  • कंवर वाला पायलट प्रोजेक्ट:
  • इससे पहले रेलवे ने जयपुर-असरवा (अहमदाबाद) एक्सप्रेस में कंबल के ऊपर एक सूती कवर (Cover) चढ़ाकर देने का प्रयोग शुरू किया था।
  • नियमित धुलाई प्रणाली:
  • इस व्यवस्था में चादर और तकिये के कवर की तरह ही कंबल के कवर को भी हर सिंगल यूज के बाद अनिवार्य रूप से धोया जाता है।
  • फीडबैक आधारित समीक्षा:
  • वर्तमान में रेलवे कंबल पर कवर लगाने और उसकी जगह सीधे कंफर्टर देने—इन दोनों प्रयोगों को परख रहा है और यात्रियों से फीडबैक ले रहा है। इन दोनों प्रणालियों की सफलता और यात्रियों की प्रतिक्रिया के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि इस सुविधा को देश की अन्य राजधानी, शताब्दी और मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में कब और कैसे लागू किया जाए।

भारतीय रेलवे बेडरोल सुधार योजना: एक नजर में मुख्य बिंदु (Train Comforter Facility)

परियोजना के पहलू (Parameters)वर्तमान स्थिति एवं नई व्यवस्था (Details)
मुख्य समस्याएसी कोचों में गंदे, दुर्गंधयुक्त और पुराने कंबल मिलने की आम शिकायतें
नया पायलट प्रोजेक्टकंबलों के स्थान पर आधुनिक, हल्के और प्रिंटेड ‘कंफर्टर’ की शुरुआत
शुरुआत का रूटनई दिल्ली-हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस (फ फर्स्ट एसी कोच)
आरंभिक तिथि11 अक्टूबर से प्रभावी
सफाई की नई तकनीकप्रत्येक राउंड ट्रिप के बाद कंफर्टर की गहरी धुलाई और सैनिटाइजेशन
वैकल्पिक प्रयोगजयपुर-असरवा एक्सप्रेस में कंबल पर जिप कवर लगाने का प्रोजेक्ट भी जारी
भविष्य की योजनायात्रियों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर अन्य ट्रेनों में विस्तार

संसद से लेकर पटरियों तक गूंजा था मामला: यात्रियों की पुरानी शिकायतों का स्थायी समाधान ढूंढ रहा रेलवे

भारतीय रेलवे के एसी क्लास में सफर करने वाले यात्रियों द्वारा बेडरोल (Bedroll) की गुणवत्ता पर सवाल उठाना आम बात हो गई थी।

विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से लेकर संसद के पटल तक यह मुद्दा कई बार गरमाया था।

यात्रियों की गरिमा और स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर विषय पर रेलवे बोर्ड ने अब संवेदनशीलता दिखाते हुए आधुनिक प्रबंधों की ओर कदम बढ़ाए हैं। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो आने वाले दिनों में देश के सभी प्रमुख रेल मार्गों पर यात्रियों को गंदे कंबलों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी और उनका सफर अधिक सुरक्षित व आरामदायक बन सकेगा।

Train Comforter Facility

भारतीय रेलवे का यह कदम यात्रियों की सुख-सुविधाओं और स्वच्छता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राजधानी एक्सप्रेस से शुरू हुआ यह बदलाव यदि सफल रहा, तो भारतीय रेल यात्रा का स्तर वैश्विक मानकों के और अधिक करीब पहुंच जाएगा।

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