Online Payment Cyber Fraud Report 2026: ऑनलाइन भुगतान करने वालों पर साइबर ठगों की पैनी नजर
Online Payment Cyber Fraud Report 2026: डिजिटल इंडिया के दौर में जहां ऑनलाइन भुगतान आसान हुआ है, वहीं साइबर अपराध के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। कॉमन कॉज और लोकनीति-सीएसडीएस (Lokniti-CSDS) द्वारा जारी ‘भारत में पुलिसिंग की स्थिति रिपोर्ट’ (SPIR 2026) के अनुसार, जो लोग ऑनलाइन भुगतान का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उन्हें धोखाधड़ी वाली फर्जी कॉल्स (Fraud Calls) आने का जोखिम सबसे अधिक रहता है।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लगभग एक-तिहाई लोगों को अक्सर फर्जी डिलीवरी या ज्यादा रिटर्न देने वाले निवेश के नाम पर ठगने के लिए फोन आते हैं। यह सर्वे देश के 16 राज्यों में 8,306 लोगों पर किया गया था, जिसमें पीड़ितों और विशेषज्ञों के अनुभव शामिल हैं।
SPIR 2026 सर्वे के मुख्य आंकड़े: शिकायत दर्ज कराने से लेकर रिश्वत देने तक की कड़वी सच्चाई
सर्वे रिपोर्ट से यह साफ होता है कि भले ही आम जनता पुलिस पर विश्वास जताती है, लेकिन साइबर अपराध होने के बाद कानूनी प्रक्रिया बेहद जटिल साबित होती है।
साइबर अपराध और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुख्य आंकड़े (Online Payment Cyber Fraud Report 2026)
| सर्वे बिंदु (Survey Parameters) | आंकड़ों में प्रतिशत (Percentage in Survey) |
| भविष्य में पुलिस शिकायत करने वाले | 48% लोगों ने कहा वे शिकायत जरूर करेंगे |
| पुलिस में शिकायत दर्ज कराने वाले पीड़ित | 51% (जबकि 11% ने संपर्क के बाद मामला छोड़ दिया) |
| प्रक्रिया को मुश्किल बताने वाले | शिकायत दर्ज कराने वाले करीब 50% पीड़ित |
| रिश्वत देने की बात स्वीकारने वाले | दर्ज शिकायतों वाले 27% पीड़ित |
| गंवाया हुआ पैसा वापस न पाने वाले | 72% डिजिटल वित्तीय ठगी के शिकार |
| बैंक की भूमिका से असंतुष्ट | 22% पीड़ित |
| बैंक-पुलिस तालमेल से असंतुष्ट | 20% पीड़ित |
| पुलिस की तैयारी पर भरोसा करने वाले | 75% लोग (29% पूरी तरह, 44% कुछ हद तक) |
गंवाया हुआ पैसा वापस मिलना सबसे बड़ी चुनौती: 72% पीड़ितों को नहीं मिली रकम
सर्वे का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि 72% पीड़ित साइबर ठगी में अपना गंवाया हुआ पैसा कभी वापस नहीं पा सके। हालांकि करीब 75% लोगों का मानना है कि पुलिस साइबर अपराधों से निपटने के लिए तैयार है, लेकिन जमीन पर रिकवरी रेट बेहद कम है।
इसके अलावा, एक-तिहाई से ज्यादा पीड़ितों ने अपने मामले में कार्रवाई पक्की कराने के लिए निजी संपर्कों और सोर्स का इस्तेमाल करके पुलिस तक पहुंचने की कोशिश की।
बैंक और पुलिस के बीच तालमेल की कमी: असंतुष्ट पीड़ितों ने बयां किया अपना दर्द
साइबर क्राइम का शिकार होने के बाद सबसे पहली मदद बैंक और पुलिस हेल्पलाइन से मिलती है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक:
- 22% पीड़ित पैसा वापस दिलाने में बैंक की भूमिका से बेहद असंतुष्ट दिखे।
- 20% पीड़ितों ने माना कि बैंक और पुलिस विभाग के बीच तालमेल की भारी कमी है, जिसके कारण मामला लटक जाता है।
- शिकायत प्रक्रिया मुश्किल होने के चलते लगभग 11% पीड़ित पुलिस के पास पहुंचने के बाद भी अपना मामला आगे नहीं बढ़ा सके।
साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें? पैसा सुरक्षित वापस पाने के लिए जरूरी कदम
यदि आप या आपके परिवार में कोई व्यक्ति डिजिटल फ्रॉड का शिकार हो जाता है, तो पैसा वापस पाने के लिए शुरुआती ‘गोल्डन आवर्स’ (1 से 2 घंटे) बहुत महत्वपूर्ण होते हैं:
- नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन: तुरंत भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और घटना की जानकारी दर्ज कराएं।
- राष्ट्रीय पोर्टल पर शिकायत: आधिकारिक वेबसाइट
cybercrime.gov.inपर जाकर अपनी शिकायत की विस्तृत जानकारी दर्ज करें। - बैंक को तुरंत सूचित करें: अपने संबंधित बैंक को तुरंत कॉल करके अपना खाता/कार्ड ब्लॉक कराएं ताकि फर्जी ट्रांजैक्शन रुक सके।
- स्थानीय थाने का रुख: नजदीकी पुलिस स्टेशन के ‘साइबर सेल’ में जाकर लिखित आवेदन दें।
- एफआईआर (FIR) की कॉपी जरूर लें।
डिजिटल वित्तीय लेनदेन अपनाते समय सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। अज्ञात नंबरों से आने वाली कॉल्स, अनजान लिंक्स और लुभावने ऑफर से दूर रहें। यदि कोई अनहोनी होती है, तो घबराने के बजाय तुरंत 1930 पर संपर्क करें और बैंक को सूचित करें।
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