Supreme Court on Journalism: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत हर कोई पत्रकार होने का दावा करता है: सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court on Freedom of Expression and Journalism: अभिव्यक्ति की आजादी पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, असली पत्रकारों की पहचान और सुरक्षा पर उठाए सवाल SC News 2026

Under freedom of expression, everyone claims to be a journalist: Supreme Court

Supreme Court on Journalism Freedom: देश की सर्वोच्च अदालत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) और पत्रकारिता के स्वरूप को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रासंगिक टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत आज के समय में कोई भी व्यक्ति खुद को पत्रकार होने का दावा कर सकता है।




ऐसी स्थिति में मान्यता प्राप्त मुख्यधारा के पत्रकारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म या सोशल मीडिया पर सक्रिय अन्य लोगों के बीच स्पष्ट अंतर करना तथा वास्तविक पत्रकारों की पहचान करके उन्हें सुरक्षा प्रदान करना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया है। यह टिप्पणी शीर्ष अदालत द्वारा दिल्ली में हाल ही में हुए प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार, मारपीट और हिरासत में लिए जाने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की गई।

दिल्ली प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों से दुर्व्यवहार: शीर्ष अदालत ने महिला पत्रकारों पर कथित हमलों के मामलों को बताया गंभीर

मामले की सुनवाई कर रही पीठ के समक्ष दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान मीडियाकर्मियों को पेश आ रही दिक्कतों का मुद्दा उठाया गया:

डिजिटल प्लेटफॉर्म और रील बनाने वालों के दौर में कोर्ट ने उठाए बड़े सवाल

असली पत्रकारों की पहचान और सुरक्षा की चुनौती

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने डिजिटल मीडिया के दौर में आ रही प्रशासनिक कठिनाइयों का जिक्र किया:

सुप्रीम कोर्ट सुनवाई मुख्य बिंदु (Supreme Court on Journalism Freedom)

सुनवाई के प्रमुख पहलू (Parameters)विवरण एवं अदालत का रुख (Details & Court Stance)
अदालत की पीठमुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ
मुख्य मुद्दादिल्ली प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों, वकीलों और प्रदर्शनकारियों पर कथित हमले
अदालत की टिप्पणीअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के कारण हर व्यक्ति का खुद को पत्रकार बताना मुश्किल स्थिति पैदा करता है
प्रमुख कानूनी पक्षवरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा प्रस्तुत दलीलें
राहत और निर्देशसंबंधित महिला पत्रकार के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने के निर्देश; केंद्र से जवाब तलब
अतिरिक्त मांगपुलिस द्वारा कथित रूप से जब्त किए गए कैमरा और अन्य उपकरणों को वापस लौटाने की मांग

पत्रकारों, वकीलों और प्रदर्शनकारियों पर हमले का मामला: केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से मांगा गया विस्तृत जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस प्रशासन को नोटिस दिया है।

अदालत ने पत्रकारों, वकीलों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से हुए हमलों से जुड़ी सभी याचिकाओं पर केंद्र से विस्तृत जवाब तलब किया है। इसके साथ ही, कार्यवाही के दौरान पुलिस द्वारा कथित तौर पर जब्त किए गए मीडियाकर्मियों के महंगे कैमरा उपकरणों और अन्य तकनीकी गैजेट्स को तुरंत वापस लौटाए जाने की मांग पर भी अदालत ने अपना ध्यान केंद्रित किया है। न्यायपालिका का यह रुख यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों के अधिकारों का हनन न हो।

Supreme Court on Journalism Freedom

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी आधुनिक डिजिटल युग में पत्रकारिता की परिभाषा और उसकी सुरक्षा के दायरे पर एक नए राष्ट्रीय बहस को जन्म देती है। एक तरफ जहां सोशल मीडिया और स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारों को अभिव्यक्ति की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ वास्तविक मीडियाकर्मियों की सुरक्षा और पेशेवर पहचान सुनिश्चित करना भी न्याय व्यवस्था के लिए एक बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

एआइ की रफ्तार पर लगाम क्यों जरूरी, मशीनें इंसानों से आगे बढ़ीं तो कौन करेगा नियंत्रण?

Supreme Court on digital media journalists, identifying genuine journalists India, Delhi protests police misconduct case, Supreme Court hearing journalists rights, Solicitor General statement on reels

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पत्रकारिता, डिजिटल प्लेटफॉर्म और पत्रकार मान्यता, दिल्ली प्रदर्शन पुलिस कार्रवाई मामला, महिला पत्रकारों पर हमला सुप्रीम कोर्ट, स्वतंत्र पत्रकारिता का अधिकार

↑
Exit mobile version