World Pharmacists Day at Dawda University Raipur: श्री दावड़ा विश्वविद्यालय, रायपुर के दावड़ा स्कूल ऑफ फार्मेसी (Dawda School of Pharmacy) द्वारा विश्व फार्मासिस्ट दिवस का गरिमामय आयोजन अत्यंत उत्साहजनक माहौल में संपन्न हुआ। इस वर्ष कार्यक्रम का वैश्विक विषय “Empowering Pharmacists for Healthier Futures” (स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना) रखा गया, वहीं इसका भारतीय उप-विषय “Swastha Bharat: Combating Antimicrobial Resistance” (स्वस्थ भारत: रोगाणुरोधी प्रतिरोध से मुकाबला) रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) की शिक्षा विनियम समिति (ERC) के अध्यक्ष एवं पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के प्रोफेसर प्रो. डॉ. दीपेंद्र सिंह थे। उन्होंने अपने ओजस्वी संबोधन में रेखांकित किया कि आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली में एक फार्मासिस्ट की भूमिका केवल दवाइयां वितरित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे मरीज-केंद्रित देखभाल और औषधि सुरक्षा के मुख्य स्तंभ हैं।
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR): स्वास्थ्य क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती और फार्मासिस्टों की निर्णायक भूमिका
वर्तमान समय में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) यानी रोगाणुरोधी प्रतिरोध वैश्विक जनस्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बनकर उभरा है। जब जीवाणु, विषाणु या कवक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं, तो सामान्य संक्रमण का इलाज भी कठिन हो जाता है।
- अत्यधिक और अनुचित उपयोग पर रोक: बिना डॉक्टर की पर्ची (Over-the-Counter) एंटीबायोटिक्स लेने की प्रवृत्ति और उनका अधूरा कोर्स करना एएमआर का मुख्य कारण है।
- फर्मासिस्टों की जिम्मेदारी: फार्मासिस्ट मरीजों को एंटीबायोटिक्स के सही उपयोग, सटीक खुराक और समय सीमा के प्रति जागरूक कर इस संकट को रोकने में सबसे प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
- जनस्वास्थ्य सुरक्षा: दवाओं के तर्कसंगत और नैतिक वितरण से ही समाज को दवाओं के दुष्प्रभावों और रेजिस्टेंस के खतरे से बचाया जा सकता है।
फार्मेसी शिक्षा का आधुनिक स्वरूप: केवल डिग्री नहीं, व्यावहारिक कौशल और नैतिक मूल्यों का विकास
प्रो. डॉ. दीपेंद्र सिंह ने गुणवत्तापूर्ण फार्मेसी शिक्षा के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि
शैक्षणिक संस्थानों को विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखना चाहिए।
- प्रायोगिक प्रशिक्षण (Practical Training): अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक अभ्यास से विद्यार्थियों में तकनीकी दक्षता आती है।
- निरंतर सीखने की प्रवृत्ति: चिकित्सा विज्ञान में रोजाना नए शोध हो रहे हैं,
- इसलिए फार्मासिस्टों को नवीनतम तकनीकों से अपडेट रहना आवश्यक है।
- नैतिक उत्तरदायित्व: रोगी की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा में व्यावसायिक ईमानदारी बनाए रखना हर फार्मासिस्ट का प्राथमिक कर्तव्य है।
विश्व फार्मासिस्ट दिवस कार्यक्रम का मुख्य विवरण (Dawda University Raipur)
| घटक (Parameters) | मुख्य बिंदु (Key Highlights) |
| आयोजन संस्थान | दावड़ा स्कूल ऑफ फार्मेसी, श्री दावड़ा विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़) |
| वैश्विक विषय (Global Theme) | Empowering Pharmacists for Healthier Futures |
| राष्ट्रीय उप-विषय (Sub-Theme) | Swastha Bharat: Combating Antimicrobial Resistance (AMR) |
| मुख्य अतिथि (Chief Guest) | प्रो. डॉ. दीपेंद्र सिंह (अध्यक्ष, ERC – PCI एवं प्रोफेसर, PRSU रायपुर) |
| विशिष्ट अतिथि (Guest of Honour) | श्री पीयूष जायसवाल (सहायक संचालक – औषधि, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, छ.ग.) |
| मार्गदर्शक सिद्धांत (Motto) | Learn • Practice • Innovate • Serve (सीखें • अभ्यास करें • नवाचार करें • सेवा करें) |
खाद्य एवं औषधि प्रशासन का संदेश: औषधियों का तर्कसंगत उपयोग और नियामक अनुपालन की आवश्यकता
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री पीयूष जायसवाल (सहायक संचालक – औषधि, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, छत्तीसगढ़)
स्वास्थ्य सेवाओं में नियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि दवाइयों के निर्माण से लेकर मरीज तक पहुंचने की पूरी श्रृंखला में सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है।
युवा फार्मासिस्टों को चाहिए कि वे सरकारी नियमों, औषधि कानूनों और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) का कड़ाई से पालन करें, ताकि बाजार में केवल गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित दवाइयां ही उपलब्ध हो सकें।
‘Learn, Practice, Innovate, Serve’: दावड़ा स्कूल ऑफ फार्मेसी का दूरदर्शी विजन और रोडमैप
दावड़ा स्कूल ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य डॉ. आशीष मजूमदार ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक दर्शन को प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है।
विश्वविद्यालय का मूल सिद्धांत “Learn • Practice • Innovate • Serve” (सीखें • अभ्यास करें • नवाचार करें • सेवा करें) विद्यार्थियों को अनुसंधान, कौशल विकास और समाज सेवा के लिए प्रेरित करता है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सीईओ श्री चिन्मय दावड़ा, महानिदेशक डॉ. चार्मी दावड़ा, मानद निदेशक श्री तुलसी दास संघानी, प्रो-वाइस चांसलर डॉ. वरुण गंजिर तथा रजिस्ट्रार श्री विपिन श्रीवास्तव सहित वरिष्ठ अधिकारी, विभागाध्यक्ष और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। मुख्य अतिथियों के सम्मान और छात्र-प्रस्तुतियों के साथ विश्वविद्यालय परिवार ने स्वास्थ्य सेवा और औषधि सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
श्री दावड़ा विश्वविद्यालय में नशा मुक्ति, एनएसएस और योग महाअभियान का सफल आयोजन
रायपुर: नवा रायपुर स्थित श्री दावड़ा विश्वविद्यालय के ओपन ऑडिटोरियम में हाल ही में एक भव्य और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें नशा मुक्ति अभियान, एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) स्थापना दिवस, योग सहभागिता और वृहद वृक्षारोपण को एक साथ जोड़ा गया।
इस विशेष आयोजन के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष श्री संजय अग्रवाल रहे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों के बीच मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी तय करना और समाज को नशामुक्त बनाना था। इस दौरान विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग के छात्रों ने योग प्रदर्शन के जरिए एक स्वस्थ जीवनशैली जीने और नशीली आदतों से दूर रहने का सशक्त संदेश दिया।
युवाओं ने ली संकल्प की शपथ एनएसएस स्वयंसेवकों और छात्र-छात्राओं ने इस कार्यक्रम में भारी उत्साह के साथ हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर एक सुर में नशामुक्त समाज के निर्माण, पर्यावरण की रक्षा और अनुशासित जीवन जीने का संकल्प लिया। इसके बाद परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया।
दिग्गजों के विचार:
- श्री संजय अग्रवाल (मुख्य अतिथि): उन्होंने अनुशासन, योग और सकारात्मक सोच ही एक सफल और ऊर्जावान जीवन की नींव हैं।
- उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज को जागरूक करने में अपनी अहम भूमिका निभाएं।
- विश्वविद्यालय के नेतृत्व (CEO चिन्मय दावड़ा, डायरेक्टर जनरल डॉ. चार्मी दावड़ा और मानद निदेशक तुलसीदास सिंघानी):
- इन सभी ने एनएसएस स्थापना दिवस की बधाई देते हुए विद्यार्थियों को नशा मुक्ति अभियान के लिए प्रेरित किया।
- प्रो-चांसलर (प्रति-कुलपति) डॉ. वरुण गंजीर: उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि ऐसे सहगामी कार्यक्रम विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सामाजिक-पर्यावरणीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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