Cancer Vaccine: क्या रूस ने खोज ली कैंसर की 100% प्रभावी वैक्सीन? जानें सच

Cancer Vaccine Fact Check: 100% प्रभावशीलता का दावा कितना सच? जानें इस नई वैक्सीन का पूरा विज्ञान

Cancer Vaccine: क्या रूस ने खोज ली कैंसर की 100% प्रभावी वैक्सीन? जानें सचचिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र से एक ऐसी खबर आई है जिसने दुनिया भर के कैंसर रोगियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगा दी है। रूसी संघीय चिकित्सा-जैविक एजेंसी (FMBA) ने हाल ही में घोषणा की है कि उन्होंने “एंटरोमेक्स” (Enteromex) नामक एक नई कैंसर वैक्सीन विकसित की है।




रूसी अधिकारियों का दावा है कि यह वैक्सीन परीक्षण चरणों को सफलतापूर्वक पार कर चुकी है। अब यह नैदानिक उपयोग (Clinical Use) के लिए तैयार है। हालाँकि, वैश्विक स्तर पर इस दावे को लेकर वैज्ञानिक जगत दो हिस्सों में बंटा हुआ नजर आ रहा है।

क्या है ‘एंटरोमेक्स’ और इसका विज्ञान?

एजेंसी की प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा के अनुसार, यह वैक्सीन mRNA (मैसेंजर आरएनए) तकनीक पर आधारित है। यह वही अत्याधुनिक तकनीक है जिसका उपयोग दुनिया की सबसे सफल कोरोनावायरस वैक्सीन में किया गया था।


Fact Check: क्या यह वैक्सीन 100% प्रभावी है?

सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में इसे “100% प्रभावी” बताया जा रहा है। आइए तथ्यों की जांच करते हैं:

तथ्य जांच (Fact Check): चिकित्सा विज्ञान में किसी भी कैंसर उपचार को 100% प्रभावी कहना जल्दबाजी है। रूसी एजेंसी ने स्वयं कहा है कि ट्यूमर में 60-80% तक की कमी देखी गई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन पूर्ण उपचार (100% Cure) का प्रमाण अभी सार्वजनिक नहीं है। यूरोपीय और अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इसके व्यापक डेटा की कमी पर सवाल उठाए हैं।

कैंसर वैक्सीन Cancer Vaccine की वर्तमान स्थिति

विशेषता (Feature)विवरण (Description)
वैक्सीन का नामएंटरोमेक्स (Enteromex)
तकनीक का नामmRNA (Messenger RNA)
प्रभावशीलता60% – 80% ट्यूमर रिडक्शन
मुख्य लक्षित कैंसरकोलोरेक्टल, ब्रेन और स्किन कैंसर
वैश्विक प्रतिद्वंदीमॉडर्ना, बायोएनटेक और मर्क

वैश्विक प्रतिस्पर्धा और विवाद

रूस की इस घोषणा ने वैश्विक फार्मा कंपनियों के बीच हलचल मचा दी है।

वर्तमान में Moderna और BioNTech जैसी कंपनियां भी इसी तकनीक पर काम कर रही हैं।

  1. राजनीतिक संदेह: पश्चिमी देशों की कुछ रिपोर्ट्स का मानना है कि रूस की यह घोषणा वैज्ञानिक से अधिक राजनीतिक हो सकती है।
  2. डेटा की कमी: वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तक इस टीके के तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल का डेटा अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित नहीं होता, इसकी पूर्ण विश्वसनीयता पर मुहर नहीं लगाई जा सकती।
  3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): इस वैक्सीन के डिजाइन में AI का उपयोग किया गया है, जो प्रत्येक रोगी के लिए व्यक्तिगत (Personalized) इलाज संभव बनाता है।

कैंसर के खिलाफ लड़ाई का भविष्य Cancer Vaccine


डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है। किसी भी नए उपचार या वैक्सीन के बारे में निर्णय लेने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या ऑन्कोलॉजिस्ट से परामर्श करें।

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