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शबे मेराज: बुलंदी का सफ़र पार्ट -2

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शब ए मेराज में क्या क्या हुवा इसे विस्तार पूर्वक लिखने की कोशिश की गई है पूरा ज़रूर पढ़े

रात के वक्त अल्लाह के रसूल ﷺ सोये हुए थे के रात के किसी पहर आपके घर जिब्राइल अलैहि० तशरीफ़ लाते है, और फिर आपको उठाकर सबसे पहले मकाम उम्मे हानी के घर से मस्जिदे हराम ले जाते है, वहा ले जाकर आपको लिटा दिया गया और फिर आपके सीने को पेट के नीचे तक चाक किया जाकर आपके दिल-वो गुर्दे को ज़मज़म से धोया गया. फिर एक कटोरी लायी गयी और ईमान ओ हिक्मत को आपके सीने ए मुबारक में डाला गया और फिर सारी चीज़ों को वापिस रख कर आपके मुबारक चाक हुवे सीने को बंद कर दिया गया।

आप ﷺ के सामने एक सवारी लायी गयी जो सफ़ेद रंग की घोड़े की शक्ल की थी जिसका नाम बुर्राक़ था. इस जानवर के बारे में आप ﷺ ने बताया के इसकी नज़र जहाँ तक जाती, उसका अगला क़दम वही होता. आप ﷺ उसपर सवार हुए और मस्जिद-ए-हराम से मस्जिद-ए-अक़्सा पहुँचे। वहां आपने बुर्राक़ को उस जगह पे बांध दिया जहाँ अम्बिया अपनी सवारियों को बाँधा करते थे. फिर आप मस्जिद-ए-अक़्सा में दाखिल हुए जहाँ तमाम अम्बिया और रसूल पहले ही से मौजूद थे. आपने वहाँ नमाज़ पढाई और सबने आपकी इमामत में नमाज़ अदा की। सुभान अल्लाह।

फिर आपको जिब्राइल अलैहिस्लाम अपने साथ ले कर आसमानो की तरफ बढ़े.

जिब्राइल अलैहिस्सलाम आपको ले कर पहले आसमान पे पहुँचे. जिब्रीले अमीन ने वहां दस्तक दी तो दूसरी तरफ से पूछा गया के आपके साथ कौन है?

जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने कहा के मुहम्मद ﷺ मेरे साथ हैं.

फिर पूछा गया के क्या उनके साथ यहां आने की आपको इजाज़त मिली है?

जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने क़ुबूल किया के उन्हें अल्लाह ने इसका हुक्म दिया है.

फिर आवाज़ आयी के मरहबा प्यारे रसूल,आपको यहां आना मुबारक

फिर दरवाज़ा खोल गया.। आप ﷺ जिब्राइल के साथ पहले आसमान पे दाखिल हुए, वहां आपने एक बुज़ुर्ग को देखा

जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने कहा के ये आपके बाप हज़रते आदम अलैहिस्सलाम हैं,

आपने हज़रते आदम अलैहिस्सलाम को सलाम किया.

हज़रते आदम अलैहिस्सलाम ने जवाब दिया और फ़रमाया के मरहबा ऐ नेक बेटे और सालेह रसूल.।

फिर आप जिब्राइल अलैहिस्सलाम के साथ दुसरे आसमान पे गए वहाँ पे भी जिब्राइल अलैहिस्सलाम से उसी तरह दरवाज़े पे पूछ-ताछ हुई और आप ﷺ का इस्तक़बाल किया गया । दूसरे आसमान पे हज़रते यहया अलैहि० और हज़रते ईसा अलैहि० से आपकी मुलाक़ात हुई और सलाम कहा।

आप ﷺ फरमाते हैं की हज़रते ईसा अलैहि० दरमियान कद के हैं और सुर्ख रंगत है, बाल घुँघराले कन्धों तक और ऐसा के जैसे अभी अभी नहाये हों.

हज़रते यहया और हज़रते ईसा अलैहि० ने भी आप ख़ूब खुश होकर इस्तक़बाल किया और कहा

मरहबा ऐ प्यारे भाई और प्यारे नबी ।

फिर जिब्राइल अलैहिस्सलाम आपको तीसरे आसमान की तरफ लेकर चले. तीसरे आसमान के दरवाज़े पर भी पहले और दुसरे आसमान की तरह पूछ-ताछ हुई और फिर आप तीसरे आसमान पे दाखिल हुए.

यहाँ आपने एक ख़ूबसूरत शख्स को देखा जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया, ये हज़रते युसूफ अलैहि० हैं.
यहां भी आपका इस्तक़बाल प्यारे भाई और प्यारे रसूल मरहबा कह कर किया गया.

फिर आप चौथे आसमान की तरफ गए और पूछ-ताछ हुई और आपने फिर चौथे आसमान पे क़दम रखा.। हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम. को देखा और उनसे मुलाकात की। इदरीस अलैहिस्सलाम भी आपसे मुहब्बत से मिले और आपका इस्तक़बाल उन्ही लफ़्ज़ों में किया जैसा के पिछले आसमानों पर.।

फिर आप पांचवे आसमान पर गए और वहाँ भी पूछ-ताछ के बाद आपने वहाँ हज़रते हारुन अलैहिस्सलाम को देखा जो हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम के बड़े भाई थे. हज़रते हारुन ने भी उनका इस्तक़बाल प्यारे भाई और प्यारे नबी जैसे अल्फ़ाज़ों से किया.

फिर आप छठे आसमान पे पहुँचे और वहां आपकी मुलाक़ात मूसा अलैहिस्सलाम से हुई. उन्होंने भी आपका इस्तक़बाल बहुत अच्छे से किया.

फिर आप आखरी और सातवें आसमान पे गए और यहाँ आपने एक बुज़ुर्ग को देखा जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने कहा ये आपके बाप हज़रते इब्राहिम अलैहिस्सलाम हैं आपने उन्हें सलाम किया और हज़रते इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने उनके इस्तक़बाल नेक और सालेह बेटे और सालेह नबी कह कर किया.

यहाँ पर आपने ‘बैतूल मामूर’ का भी दीदार किया. बैतूल मामूर , बैतुल्लाह (काबा शरीफ के ठीक ऊपर सातवें आसमान पे है और इसके बारे में बयान है के 70,000 फ़रिश्ते एक दफा में इसका तवाफ़ करते हैं और जो फरिश्ता एक दफा बैतूल मामूर का तवाफ़ कर लेता है फिर उसको क़यामत तलक तवाफ़ का दूसरा मौक़ा नहीं मिल सकता है।

फिर जिब्राइल अलैहिस्सलाम आपको ले कर आगे बढे और आप सिदरतुल मुन्तहा को पहुँचे. यहां आपने एक बहुत बड़ा दरख़्त देखा जिसके पत्ते हाथी के कानों के बराबर थे और जिसपे बड़े बड़े घड़ों जैसे बड़े फल लगे हुए थे. उसकी जड़ों से चार नहरें फूट रही थी जिब्रील अलैह.ने आपको बताया के इनमे से दो नहरें बातिन हैं जो जन्नत की तरफ जाती हैं और दो नहरें दुनिया की तरफ. दुनिया की तरफ जाने वालीं नहरें नील और फुरात हैं।

जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने फिर आपको बतलाया के सिदरतुल मुन्तहा से आगे किसी को भी जाने की इजाज़त नहीं है अगर मै भी इससे आगे बढ़ा तो मेरे पर जल जाएंगे लिहाज़ा इससे आगे का सफ़र आपको तन्हा ही करना होगा ।

और फिर आका ए करीम सिदरतुल मुनतहा सेआगे बढ़े।

इससे आगे जो मकाम था, उसे ला मका कहा जाता है जहाँ पर आपसे पहले कोई और नहीं पहुंच सका था। अल्लाह ने अपने प्यारे महबूब को इस मकाम पर बुलाया

जहां मेहबूब और मुहीब के बीच कोई फासला बाकी ना रहा।
। सुभान अल्लाह।

हमारे प्यारे आक़ा से अल्लाह ने राजो न्याज़ की क्या क्या बाते की इसे सिवाय आका ए करीम के कोई और नही जान सकता है।

मेरे जैसे हर एक आशिक के ज़हेन में ये सवाल आता है की आखिर सिर्फ हमारे आक़ा नबी ए करीम को ही अल्लाह ने मेराज का शर्फ क्यों बक्शा!

क्या सिर्फ नमाज़ का तोहफ़ा देने के लिए अल्लाह ने अपने मेहबूब को अर्श पर बुलवाया था?

अल्लाह को अगर सिर्फ नमाज़ का तोहफ़ा देना होता तो इसे वो हजरते जिब्रील अलैहिस्सलाम के ज़रिये भी कहलवा सकता था तो फिर अल्लाह को अपने प्यारे हबीब को रूबरू बुलवाकर कहने की क्या ज़रूरत थी ?

जिसका जवाब मेरी नज़र में एक तो ये है की जैसा की हम जानते ही हैं की अल्लाह ने सबसे पहले हमारे प्यारे आक़ा नबी ए करीम के नूर को पैदा फरमाया था यानि जब कही कुछ भी ना था,ना ये ज़मी थी ,ना आसमा था ,ना लौहो कलम, न जन्नत न दोज़ख,न फ़रिश्ते न जिन्नों,इन्स,कुछ भी ना था तो रब रब के नज़दीक आका ए करीम का नूर था।

जहन में सवाल आता है की उस वक्त हमारे प्यारे नबी ए करीम का नूर आख़िर रखा कहा था ?

इसका जवाब आक़ा की मेराज से मिल गया, नमाज़ तो एक बहाना था, दर हकीकत मेराज के ज़रिये अल्लाह ने हमारे प्यारे आक़ा की अजमत का इज़हार तमाम नबियो, रसूलो फरिश्तो, जिन्नों,इन्स यानी सारी कायनात पर ज़ाहिर कर दिया की जिस नूर को अल्लाह ने सबसे पहले बनाया है, उस नूर में सारी सिफत मौजूद है लिहाज़ा सिर्फ नबी ए करीम में वो नूर मौजूद होने की वजह से सिर्फ उनमे ही अल्लाह के इतने करीब आने की ताब हो सकती थी ।

जब अल्लाह से आपकी मुलाकात हुई होगी तो क्या ख़ूब मंज़र होगा,क्या क्या बाते हुई होगी इसे बहोत से उलमा ने बहोत ही बेहतरीन अंदाज़ में बतलाया है

जब आप नायलैन शरीफ उतारने लगे तो अल्लाह ने कहा ए महबूब ऐसे ही चले आओ। सुभान अल्लाह। जबकि हज़रत मूसा जो अल्लाह से कलाम किया करते थे, उन्होंने भी एक बार ख्वाहिश की थी की रब का दीदार हो जाए। लेकिन अल्लाह ने उनसे कहा था ऐ मूसा तुममे मुझे देख पाने की ताब नहीं है फिर भी मूसा के बार बार इसरार पर रब तआला ने अपने नूर का एक ज़र्रा कोहेतूर पर जब डाला तो पहाड़ रेजा रेजा हो गया था । हज़रत मूसा अपने रब के नूर के जर्रे की ताब को सहन न कर सके और वे भी गश खाकर गिर गए थे मगर वो मूसा थे और ये हमारे आका जिनकी अजमत अल्लाह ने मेराज के जरिए दिखा दी थी ।

आगे क्या हुवा समाद फरमाए।

आपसे अल्लाह ने न जाने कितने ही राजो न्याज की बाते की होगी। इसे तो सिर्फ़ अल्लाह और उसका महबूब ही बेहतर जानता होगा।

अल्लाह ने अपने महबूब की उम्मत के लिए पचास फ़र्ज़ नमाज़ों का तोहफा दिया।

आप ﷺ इस तोहफे के साथ वापिस आये और जब आप ﷺ का गुज़र छठे आसमान से हुआ तो आपको हज़रते मूसा अलैहि० ने रोका और पूछा के उन्हें मेराज में क्या तोहफ़ा मिला. आपने हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम को बताया के आपको तोहफे में अल्लाह तबारक -तआला ने 50 नमाज़ें दी हैं.

ये सुन कर हज़रते मूसा अलैहि० ने उन्हें मश्विरा देते हुए कहा के आपकी उम्मत के लिए मुश्किल होगा इसलिए आप वापिस जाएँ और नमाज़ों की तादाद कम कराएँ।

आप वापिस गए और फिर तादाद कम करा कर वापिस मूसा के पास से गुज़रे. फिर मूसा ने सवाल किया के कितना कम हुआ तो आपने बताया 5 कम हुआ (कुछ रिवायत में 10). मूसा ने उन्हें फिर से वापस जाने और कम कराने का मशवरा दिया.

ये सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक के आपके तोहफे की तादाद 5 नमाज़ें न हो गयी.
मूसा अलैहि० ने ये सुना तो फिर फ़रमाया के आपकी उम्मत के लिए ये 5 नमाज़ें भी मुहाल होंगी क्योंके मैंने बनी इस्राइल का हाल देखा है. आप फिर से वापस जाएँ और इन्हें कम कराएँ.

आप ﷺ ने फ़रमाया ऐ मूसा, मैं अपने रब से राज़ी हो गया, अब मैं वापस नहीं जाऊंगा. मुझे अपने रब से नमाजे और कम करने को कहने में हया आती है।

तभी आवाज़ आयी,के ऐ मुहम्मद ﷺ, मैंने आपकी उम्मत की हर नेकी को 10 गुना बढ़ दिया है. यानि जो 5 नमाज़ें हैं बेशक वो तादाद में 5 हैं मगर उसके बदले 50 नमाज़ों का सवाब मिलेगा. अल्लाह अपने क़ौल से फिरा नहीं करता ।

दूसरी वजह मेराज में बुलाकर नमाज़ का तोहफ़ा देने की यह भी हो सकती है की अल्लाह ने बतलाया की नमाज़ मोमिन की मेराज है यानि इसके ज़रिए ही एक मोमिन अपने रब का कुर्ब हासिल कर सकता है।
बहर हाल अल्लाह ही बेहतर जानने वाला है।

फिर आपने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम से विदा ली और वापस चले।

कुछ रिवायत में मेराज के हवाले से यह भी लिखा गया है के आपके सामने जिब्राइल ने 3 (किसी रिवायत में 4 ) प्याले पेश किये जिनमे शराब, शहद, दूध. फिर आपसे कोई एक प्याला उठाने को कहा गया.
आप ﷺ ने दूध का प्याला उठाया. जिब्राइल ने उनसे ﷺ कहा के आप फितरत पे हैं… यानि आप ईमान प पर हैं.

इस मेराज के सफर के दौरान आपको जन्नत की तरफ भी ले जाया गया. आपने जन्नत में नहरे -कौसर को देखा, जिसके दोनों किनारे बड़े बड़े मोतियों जैसे घर थे और जिसकी सतह मुश्क की थी.आपने उसमे हाथ डाल कर देखा. फिर आपने जन्नत के मैदानों और बागों को देखा।

आपको जहन्नम की भी सैर करवाई गयी . आपने जहन्नम के दारोगा जिसका नाम मालिक है उसको देखा. आपने एक शख्श को देखा जिसके नाख़ून पीतल के थे और वो अपने चेहरे और बदन को नोच रखा था. आपने पूछा के ये कौन है, जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने कहा ये वो है जो दूसरों की इज़्ज़त से खेलता था और उन्हें शर्मसार करता था.।फिर आपने देखा एक शख्स के बड़े होंटों को आग की कैंची से काटा जा रहा फिर तुरत ही होंठ वापिस आते हैं फिर काटा जाता है. आपने पूछा ये कौन है , जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया ये वो हैं जिन्होंने अल्लाह की किताब पढ़ी मगर उनके हुक्म का इनकार किया.(जन्नत और जहन्नम से जुड़े और भी वाकियात पेश आये फिर आपको वापस ज़मीन यानि दुनिया की तरफ़ लाया गया, रास्ते में आपने एक भटकी हुई ऊंटनी भी देखी जो एक काफिले से बिछड़ गयी थी.आप सुबह को मक्का पहुचे और जब सारी बाते आपने लोगो से बतलाई तो जो ईमान वाले थे उन्होंने मरहबा कहा और 5 वक्त की नमाज़ों के लिए अपने रब का शुक्र अदा किया और जिस ऊंटनी के बारे में आपने बतलाया गया था वो उसी जगह पर मिली जहाँ आपने कहा था मगर इसके बावजूद उस दौर में भी कच्चे ईमान वाले थे या जो ईमान पर नहीं थे तो उन्होंने इस पर भरोसा नहीं किया आज भी ऐसे लोग मौजूद है जो पांचो वक्त की नमाज़ भी पढ़ रहे है मगर शब् ए मेराज पर उनका अकीदा डावांडोल है, अगर वो ये सोचे की अगर बुलाने वाली जात अल्लाह है तो कुछ भी नामुमकिन नही है। यही वजह है की जो राहे हक़ पर है जिनके सीनों में इश्के मुस्तुफा है वो आज भी इस शब् अपने प्यारे आका की मेराज का ज़िक्र करते है उनके उम्मती होने पर अल्लाह का शुक्र अदा करते है और इसे बड़ी रात मान कर इस शब् को नमाज़ और इबादतों में गुज़ारते है अपने आका पर सलातो सलाम दरूद शरीफ का नज़राना पेश करते है I अल्लाह इस मुबारक शब् के सदके अपने प्यारे महबूब की मेराज के सदके वो तुफैल हम सबको माफ़ करे और हमे नमाज़ पढ़ने वाला बना दे अपने रब की इबादत करने वाला बना दे । आमीन

🖊️तालिमे इल्म: एड शाहिद इक़बाल खान,
चिश्ती -अशरफी

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